छत्तीसगढ़

सेवा की कहानी : राज्य डेयरी उद्यमिता योजना से मनोज कुमार पटेल ने संवारा डेयरी व्यवसाय, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाए कदम

A Story of Service: Manoj Kumar Patel Revitalizes His Dairy Business Through the State Dairy Entrepreneurship Scheme, Taking Steps Towards Self-Reliance.

प्रतिदिन 30 लीटर दूध की बिक्री से हो रही 1,200 रुपये की आमदनी, हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की बचत

पशुपालन विभाग से मिले अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन ने बदली आजीविका की तस्वीर

रायपुर। मेहनत, लगन और शासन की योजनाओं का सही लाभ मिले तो पशुपालन भी ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। सरगुजा जिले के ग्राम लमगांव निवासी मनोज कुमार पटेल ने इसे अपने प्रयासों से साबित किया है। राज्य डेयरी उद्यमिता योजना के तहत पशुपालन विभाग से मिले अनुदान और मार्गदर्शन की मदद से उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया है। आज दूध की नियमित बिक्री से उन्हें हर महीने अच्छी आमदनी हो रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

मनोज कुमार पटेल बताते हैं कि पशुपालन को आय का स्थायी साधन बनाने के उद्देश्य से उन्होंने राज्य डेयरी उद्यमिता योजना का लाभ लिया। योजना के अंतर्गत पशुपालन विभाग से प्राप्त अनुदान राशि का उपयोग गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को विकसित करने में किया। विभागीय अधिकारियों से मिले मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे डेयरी व्यवसाय को आय के भरोसेमंद माध्यम के रूप में स्थापित किया।

प्रतिदिन 30 लीटर दूध की बिक्री से मिल रही नियमित आमदनी

वर्तमान में मनोज कुमार पटेल प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध का विक्रय कर रहे हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन करीब 1,200 रुपये की आमदनी होती है। दूध की नियमित बिक्री से महीने में लगभग 30 से 35 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य आवश्यक खर्चों को निकालने के बाद उन्हें लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह की बचत हो रही है।

मनोज बताते हैं कि डेयरी व्यवसाय से वे सालाना लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक की बचत कर पा रहे हैं। नियमित आय का साधन मिलने से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में सुविधा हुई है। साथ ही भविष्य में अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी मिला है।

शासकीय योजना और विभागीय सहयोग से मिली आर्थिक मजबूती

मनोज कुमार पटेल का कहना है कि राज्य डेयरी उद्यमिता योजना से मिले अनुदान ने उनके डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें व्यवसाय को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिली है।

उन्होंने योजना का लाभ मिलने पर पशुपालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासकीय सहायता और स्वयं की मेहनत से आज वे अपने परिवार की आजीविका को बेहतर बनाने में सफल हो रहे हैं।

मनोज कुमार पटेल की सफलता की यह कहानी बताती है कि शासन की हितग्राहीमूलक योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य डेयरी उद्यमिता योजना के माध्यम से पशुपालन को अपनाकर ग्रामीण युवा और किसान नियमित आय अर्जित करने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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