तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित
Justice Made Accessible Through Technology, Fairness Ensured Through Law: Legal Seminar on ‘Nyaya Shruti Niyam, 2025’ and Digital Evidence Exhibition Held at Durg District Court

रायपुर । न्याय की राह में दूरियाँ कम हो रही हैं और तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को नए आयाम दे रही है। अब ऑडियो-वीडियो माध्यमों से साक्ष्य दर्ज करने से लेकर डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को समझने तक, न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में तकनीक का उपयोग केवल सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि विधिसम्मत, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना भी आवश्यक है।
इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में 16 अक्टूबर को “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विधिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में न्यायिक कार्यवाही के आधुनिक स्वरूप, साक्ष्य की प्रक्रिया और तकनीकी साधनों के विधिसम्मत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के साथ ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने आयोजन को व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक स्वरूप प्रदान किया।
’न्यायालय की सीमाओं से परे साक्ष्य, लेकिन विधि के दायरे में’
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर तथा प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, दुर्ग श्रीमती सुमन एक्का की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित संगोष्ठी में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग कु. दीपांशी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब विधिक प्रावधानों का पालन करते हुए साक्ष्य की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
’ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों की प्रदर्शनी : तकनीक को समझने का व्यावहारिक माध्यम’
संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आयोजित ई-साक्ष्य की प्रक्रिया एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी का उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रक्रिया, उनके महत्व और न्यायिक कार्यवाही में उनकी प्रासंगिकता के प्रति समझ विकसित करना था।
इस पहल ने संगोष्ठी की विषयवस्तु को व्यावहारिक आयाम प्रदान किया। जहाँ संगोष्ठी में नियमों और प्रक्रियाओं की विधिक व्याख्या की गई, वहीं प्रदर्शनी के माध्यम से ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित जानकारी को एक अलग और सहज स्वरूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार न्यायिक तकनीक से जुड़े विषयों को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए, उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी और जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया।
’विधिक जागरूकता में नवाचार: रंगोली ने भी बढ़ाई आयोजन की गरिमा’
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आकर्षक रंगोली का निर्माण कराया गया। रंगोली ने आयोजन को रचनात्मक स्वरूप प्रदान करने के साथ उसकी शोभा भी बढ़ाई। विधिक संगोष्ठी, डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी और कलात्मक प्रस्तुति का यह समन्वय दर्शाता है कि विधिक जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक, दोनों प्रकार के माध्यम उपयोगी हो सकते हैं।
’न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक और संस्थागत समन्वय पर जोर’
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण के अतिरिक्त उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, सचिव श्री रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय और साझा समझ के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन पक्ष तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रावधानों और ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था।




