छत्तीसगढ़
फर्जी पत्रकार बनकर पंचायत से वसूली का आरोप, सरपंच ने एसपी को सौपा ज्ञापन
Sarpanch submits memorandum to SP alleging extortion from Panchayat by posing as fake journalist

पत्रकारिता की दबंगई दिखा कर शासकीय कार्य में बाधा डालने वाले पंचायत में वसूली करने वाले युवक पर SP कार्यालय में कानूनी कार्यवाही करने सौंपा जनप्रतिनिधियों ने सौंपा ज्ञापन।
सरपंच ने पंचो के साथ पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन
जांजगीर-चाम्पा। जिले में पत्रकारिता की आड़ में वसूली और दबंगई करने वालों का एक और मामला सामने आया है। नवागढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पुटपुरा में एक युवक द्वारा खुद को पत्रकार बताकर शासकीय निर्माण कार्य रुकवाने, पंचायत प्रतिनिधियों को धमकाने और पैसों की मांग करने का सनसनीखेज आरोप लगा है। ग्राम पंचायत पुटपुरा की सरपंच सुचिता देवी राठौर ने पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चाम्पा को लिखित शिकायत देकर बताया कि 2 फरवरी 2025 को उनके पंचायत क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 05 में सीसी रोड निर्माण का कार्य चल रहा था। इसी दौरान ग्राम तिलई निवासी दीपक तिवारी नामक युवक मौके पर पहुंचा और स्वयं को पत्रकार बताते हुए पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने लगा। शिकायत के मुताबिक युवक ने खुलेआम धमकी दी, मजदूरों को काम बंद करने के लिए उकसाया और मौके पर मौजूद महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया। गाली-गलौज और हंगामे के चलते सीसी रोड निर्माण कार्य को घंटों तक रोकना पड़ा। यह सीधे-सीधे शासकीय विकास कार्य में बाधा डालने का मामला बताया जा रहा है। मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि इसके बाद उक्त युवक सरपंच के निवास पहुंचा और पत्रकारिता का डर दिखाकर कथित विज्ञापन के नाम पर पैसों की मांग करने लगा। जब पंचायत स्तर पर अन्य सरपंचों से जानकारी ली गई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि दीपक तिवारी नाम का व्यक्ति जिले के किसी भी मान्यता प्राप्त समाचार पत्र, चैनल या मीडिया संस्थान से जुड़ा ही नहीं है। यानी पत्रकारिता के नाम पर पंचायतों को डराकर वसूली करने का खेल खुलेआम चल रहा है।सरपंच सुचिता देवी राठौर ने अपनी शिकायत में साफ कहा है कि यदि ऐसे फर्जी पत्रकारों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो पंचायत और अन्य शासकीय कार्यों में लगातार रुकावट डाली जाती रहेगी। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस फर्जी पत्रकार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। जानकारों के मुताबिक़ पुलिस वालों से भी इस युवक ने वसूली की है और धमकाया है। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पत्रकारिता की साख से खिलवाड़ करने वाले ऐसे नकाबपोशों पर कानून का शिकंजा कसेगा? या फिर फर्जी पहचान के सहारे वसूली का यह खेल यूँ ही चलता रहेगा? इस मामले को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा जांच की बात कही जा रही है।





