
किराना और फोटोकॉपी व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भर
लक्ष्मी समूह से मिली नई दिशा
ममता की सफलता की यात्रा ‘लक्ष्मी स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने के साथ शुरू हुई। समूह की बैठकों ने न केवल उन्हें बचत का महत्व समझाया, बल्कि उनमें कुछ नया करने का आत्मविश्वास भी भरा। इसी हौसले के दम पर उन्होंने समूह से ऋण लिया और अपने घर के पास ही एक छोटी सी किराना दुकान की नींव रखी।
किराना दुकान से फोटोकॉपी मशीन तक का सफर
किराना व्यवसाय के सफल संचालन के बाद ममता ने रुकने के बजाय विस्तार का सोचा। अपनी आय को बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने फोटोकॉपी मशीन खरीदी। आज उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि मासिक आय 20 से 30 हज़ार तक अर्जित कर रही हैं। ममता अपने परिवार की प्रमुख आर्थिक आधार बन कर संबल प्रदान कर रही हैं। गाँव की अन्य महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश कर महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं। ममता राजवाड़े ने कहा कि व्यवसाय भले ही छोटा हो, लेकिन वह आपके आत्मविश्वास को बहुत बड़ा बना देता है। समूह ने मुझे सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला दिया है।
एक मिसाल बनीं ममता
समुदाय में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए व्यवसायों और निजी क्षेत्र को व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। ममता राजवाड़े की यह कहानी साबित करती है कि यदि महिलाओं को स्व-सहायता समूह जैसे माध्यमों से सही मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग मिले, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।




