छत्तीसगढ़

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष-हौसले की उड़ान

International Women's Day Special - Flight of Courage

नेट की परीक्षा में 33 वाँ रैंक हासिल कर सूरजपुर की बेटी निधि गुप्ता ने रोशन किया जिले का नाम

रायपुर । महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, मेहनत और समर्पण के साथ करते हुए प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों को नई दिशा देने आगे आ रही हैं। यह स्थिति न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, बल्कि समाज में उनके प्रति बदलती सोच का भी स्पष्ट संकेत है। निधि गुप्ता ने यह साबित किया है कि शासकीय शिक्षा भी उत्कृष्टता की नींव बन सकती है, बशर्ते इरादा पक्का हो। निधि ने देश की अत्यंत कठिन सीएसआईआर नेट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 33 वाँ रैंक अर्जित की और सूरजपुर का नाम राष्ट्रीय मानचित्र पर गौरव के साथ अंकित किया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जब हम उन महिलाओं की बात करते हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीवित रखा, तो सूरजपुर जिले की बेटी निधि गुप्ता का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। शासकीय विद्यालय की पढ़ाई से लेकर देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में शीर्ष रैंक तक उनका सफर संघर्ष, संकल्प और सफलता की एक अनूठी मिसाल है। निधि की प्रारंभिक शिक्षा सूरजपुर जिले के शासकीय कन्या विद्यालय में हुई। संसाधनों की कमी एक वास्तविकता थी, पढ़ाई के दौरान कई उतार-चढ़ाव भी आए लेकिन निधि ने कभी हौसला नहीं खोया। उनके मज़बूत इरादों के आगे हर बाधा बौनी साबित होती रही।

स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए उन्होंने शासकीय रेवती रमण मिश्र महाविद्यालय, सूरजपुर में प्रवेश लिया, जहाँ के प्रोफेसरों ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी। रसायन विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. विकेश कुमार झा का मार्गदर्शन उनके जीवन का अहम मोड़ बना। उनकी प्रेरणा और दिशा-निर्देशन से निधि ने देश की अत्यंत कठिन सीएसआईआर नेट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 33 वाँ रैंक अर्जित की और सूरजपुर का नाम राष्ट्रीय मानचित्र पर गौरव के साथ अंकित किया।

निधि के शब्दों में उनकी पूरी यात्रा का सार समाया है -’’महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन सपनों को जीने का दिन है, जो हमने खुली आँखों से देखे हैं।’’ निधि गुप्ता की यह सफलता जिले की उन तमाम बेटियों के लिए एक प्रकाश-स्तंभ ह,ै जो सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को पालती हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि शासकीय शिक्षा भी उत्कृष्टता की नींव बन सकती है कि बशर्ते इरादा पक्का हो।

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