बिहान’ ने बदली जल कुमारी की तकदीर, अभावों से निकलकर बनीं ’लखपति दीदी’
'Bihan' changed Jal Kumari's fortunes, overcoming hardships, she became 'Lakhpati Didi'.

आजीविका की अलग-अलग गतिविधियों से हो रही अच्छी आमदनी
अंधेरे से उजाले की ओर एक कदम
जल कुमारी बताती हैं कि साल 2013 से पहले उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उन्हें बैंकिंग कार्यों और सरकारी योजनाओं की कोई जानकारी नहीं थी। 16 मार्च 2013 को जब वे महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, तो उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के माध्यम से छोटी-छोटी बचत की आदतों ने उन्हें आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया।
सूकर पालन से शुरू हुआ स्वावलंबन का सफर
समूह से जुड़ने के बाद जल कुमारी को रिवॉल्विंग फंड (RF) के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि से महज 1,500 रुपये का ऋण लेकर सूकर पालन शुरू किया। इस छोटे से निवेश ने उन्हें सालाना 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी करानी शुरू कर दी, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
व्यापार में विस्तार और बहुआयामी आय
अपनी सफलता को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सामुदायिक निवेश कोष (CIF) से 70,000 रुपये का लोन लिया। इस राशि से उन्होंने न केवल किराना दुकान खोली, बल्कि आटा चक्की और धान चक्की भी लगाया। उन्होंने सिर्फ 2 बकरियों से बकरी पालन शुरू किया था, जो आज बढ़कर 17-18 बकरियों का झुंड बन चुका है। इससे उन्हें सालाना 25 से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। आज जल कुमारी की कुल सालाना आमदनी डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुँच गई है।
बच्चों का भविष्य और नई पहचान
जल कुमारी की आंखों में सबसे बड़ी चमक अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर है। वे गर्व से कहती हैं कि आज उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत है कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं। वह ’बिहान’ को अपनी नई पहचान का आधार मानती हैं।
शासन की योजना से मिली आत्मनिर्भरता
अपनी खुशहाली का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को देते हुए जल कुमारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार के प्रयासों से आज गांव की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज की मुख्यधारा में जुड़ रही हैं।




