सिम्स में जटिल टीबी मरीज का सफल उपचार, आधुनिक जांच से हुआ सही निदान
Successful treatment of a complex TB patient at SIMS, accurate diagnosis using modern testing

स्वास्थ्य मंत्री की पहल से उपलब्ध आधुनिक मशीनों से संभव हुआ उपचार
रायपुर । छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के श्वसन रोग विभाग में चिकित्सकों ने एक जटिल टीबी मरीज का सफल उपचार कर उसे नई जिंदगी दी है। आधुनिक जांच पद्धतियों और उन्नत मशीनों की सहायता से मरीज की बीमारी का सही निदान कर समय पर उपचार शुरू किया गया। अस्पताल प्रशासन ने इस उपलब्धि को राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ होने का उदाहरण बताया है।
जानकारी के अनुसार मई 2025 में रतनपुर क्षेत्र की 19 वर्षीय महिला मरीज खांसी-जुकाम, शाम के समय बुखार, भूख में कमी, वजन में गिरावट तथा सामान्य कमजोरी की शिकायत लेकर सिम्स के श्वसन रोग बाह्य रोगी विभाग में पहुंची थी। मरीज पिछले लगभग पांच महीने से दवा-संवेदनशील क्षय रोग (डीएस-टीबी) की दवा ले रही थी, लेकिन लक्षणों में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था।
श्वसन रोग विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतीक कुमार, सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार डनसेना तथा वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. आकांक्षा गुप्ता ने मरीज की विस्तृत जांच की। छाती के एक्स-रे में दोनों फेफड़ों में फाइब्रो-कैविटेटरी घाव पाए गए। प्रारंभिक बलगम जांच में टीबी निगेटिव आने के बाद चिकित्सकों ने ब्रोंकोस्कोपी जांच की सलाह दी, जिसमें दूरबीननुमा नली से सांस की नलियों की जांच कर ब्रोंको-एल्वियोलर लवाज का नमूना लिया गया।
आधुनिक जांच में ब्रोंको-एल्वियोलर लवाज के कार्ट्रिज आधारित न्यूक्लिक एसिड प्रवर्धन परीक्षण में रिफैम्पिसिन प्रतिरोधी टीबी की पुष्टि हुई। साथ ही लाइन प्रोब एसे जांच में रिफैम्पिसिन और आइसोनियाजिड दोनों दवाओं के प्रति प्रतिरोध पाया गया। इसके बाद दवा-प्रतिरोधी क्षय रोग के कार्यक्रमगत प्रबंधन की गाइडलाइन के अनुसार मरीज को पूर्णतः मौखिक दीर्घकालीन बहु-दवा प्रतिरोधी टीबी उपचार पद्धति पर नई दवाओं से उपचार शुरू किया गया।
उपचार के दौरान 31 जुलाई 2025 को मरीज पुनः सांस फूलने और ऑक्सीजन की कमी की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंची। जांच में दोनों फेफड़ों में न्यूमोथोरैक्स (फेफड़ों में हवा भर जाना) पाया गया। चिकित्सकों ने दाहिनी ओर इंटरकॉस्टल ड्रेनेज ट्यूब लगाकर उपचार किया, जबकि बाईं ओर का उपचार संरक्षणात्मक तरीके से किया गया।
उचित उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और उसे छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में मरीज बहु-दवा प्रतिरोधी टीबी के पूर्णतः मौखिक उपचार पर है और उसके लक्षणों में लगातार सुधार हो रहा है।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स में टीबी सहित जटिल श्वसन रोगों के उपचार के लिए आधुनिक जांच सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है। समय पर सही जांच और उपचार से गंभीर रोगियों को भी स्वस्थ किया जा सकता है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि टीबी के मरीजों को दवाओं का पूरा कोर्स नियमित रूप से लेना बेहद जरूरी है। यदि उपचार के बावजूद लक्षण बने रहें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
श्वसन रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतीक कुमार ने कहा कि आधुनिक जांच तकनीकों की सहायता से दवा-प्रतिरोधी टीबी का समय पर पता लगाया जा सकता है, जिससे मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल जी के पहल से उन्होंने राज्य के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक मशीनें और उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप सिम्स में अत्याधुनिक जांच उपकरण उपलब्ध हो सके हैं, जिनकी मदद से जटिल रोगों का भी समय पर सही निदान और उपचार संभव हो पा रहा है।




