बंजर डंप क्षेत्र से हरा-भरा जंगल बनने की ओर गेवरा की अनूठी पहल
Geevra's unique initiative to transform a barren dump area into a lush green forest

रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। कोरबा जिले के गेवरा परिक्षेत्र में स्थित 12.45 हेक्टेयर के डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण कर बंजर भूमि को हरियाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की इस पहल की सराहना की है।
जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां उगा जंगल
कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है, जबकि ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष और अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्र आमतौर पर बंजर हो जाते हैं और वहां पौधों का उगना बेहद कठिन होता है।
लेकिन वन विकास निगम के प्रयासों से यही बंजर भूमि अब धीरे-धीरे हरियाली से ढकती जा रही है।
वैज्ञानिक पद्धति से किया गया वृक्षारोपण
डंप क्षेत्र में जल स्तर कम होने और पोषक तत्वों की कमी को ध्यान में रखते हुए विशेष उपाय किए गए। वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग कर मिट्टी को उर्वर बनाया गया, जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए, 3–4 फीट ऊंचाई के स्वस्थ पौधों का चयन कर रोपण किया गया।
मिश्रित प्रजातियों से बढ़ेगी जैव विविधता
इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, सहतूत, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।
इनसे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों, गिलहरी और अन्य वन्य जीवों के लिए अनुकूल आवास बन सकेगा।
निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता
रोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है, जिसमें सिंचाई, निंदाई- गुड़ाई,खाद डालना, सुरक्षा और घास कटाई मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन जैसे कार्य शामिल हैं। वर्ष 2025 से 2029 तक 5 वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को एसईसीएल गेवरा को सौंपा जाएगा।
प्रेरणादायक परिणाम
यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, तकनीक और सतत प्रयासों से पत्थरीली व अनुपजाऊ भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता हैl गेवरा का यह डंप क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक सघन, हरित और जैव विविधता से भरपूर मानव-निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक पहल बन चुकी है।




