छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का ‘लखपति ग्राम’: हर घर में हैं संपन्न महिलाएँ

Chhattisgarh's 'Lakhpati Village': Every household has wealthy women

रायपुर। लखपति दीदी के बाद अब छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का औराटोला गांव लखपति ग्राम बन गया है। यहां हर घर की एक महिला ‘लखपति दीदी’ बन चुकी है, जो सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित कर रही है।

ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर औराटोला लखपति ग्राम घोषित हुआ है। जल्द ही राज्य स्तर पर भी औपचारिक घोषणा हो सकती है। गांव की महिलाओं ने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़कर आधुनिक कृषि, पशुपालन, मशरूम उत्पादन और लघु उद्यमों को अपनाया है।

65 सदस्य लखपति दीदी बन चुकी हैं

जिला प्रशासन और आजीविका मिशन के सहयोग से उन्हें प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए गए, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। औराटोला के कुल 65 परिवार, छह स्व-सहायता समूह की 65 सदस्य लखपति दीदी बन चुकी हैं।
औराटोला को लखपति ग्राम घोषित किया जा चुका है

ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर औराटोला को लखपति ग्राम घोषित किया जा चुका है। इसका भौतिक सत्यापन भी पूरा हो गया है। अब राज्य स्तर पर औपचारिक घोषणा की प्रतीक्षा है। अन्य ग्राम पंचायतों की महिलाएं और ग्रामीण अब औराटोला का भ्रमण कर यहां के माडल को समझने आ रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक शक्ति का उपयोग कर एक तंत्र का निर्माण किया गया है। आजीविका सखियों और पशु सखियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जो घर-घर जाकर महिलाओं को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं।

बालोद जिले में 20,982 लखपति दीदी बनाई गईं

केस-1 : मत्स्य पालन का लिया प्रशिक्षण कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उन्होंने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग द्वारा मछली पालन का प्रशिक्षण लिया। समूह के माध्यम से 50 हजार का ऋण लिया और तालाब की सफाई कराकर मछलियों के बीज डाले। साथ ही 20 डिसमिल पैतृक जमीन पर सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया। वे साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं। सब्जी से भी आमदनी होती है। सभी खर्च काटकर वार्षिक शुद्ध आय एक लाख 17 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

केस दो : पशुपालन, मशरूम उत्पादन के साथ सिलाई का काम लोकेश्वरी साहू ने बताया कि पशु पालन के लिए पशु सखी से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से एक लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गायें खरीदीं। साथ ही आरसेटी के माध्यम से सिलाई का प्रशिक्षण लेकर कार्य शुरू किया। कृषि विज्ञान केंद्र अरौद से मशरूम की खेती का प्रशिक्षण लेकर उत्पादन का काम शुरू किया। दूध, दुग्ध उत्पादों, मशरूम की बिक्री और सिलाई कार्य से मासिक आय 11 हजार रुपये से अधिक हो गई है।

जिले में लखपति ग्राम बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य कार्यालय से तकनीकी सलाहकार एजेंसी ने इसका भौतिक सत्यापन पूरा कर लिया है। यथाशीघ्र राज्य स्तर पर भी ग्राम औराटोला को लखपति ग्राम घोषित करने के लिए कार्रवाई की जाएगी।

-सुनील कुमार चंद्रवंशी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, बालोद

प्रदेश के सभी जिलों में लखपति दीदी ग्राम के लिए प्रयास किया जा रहा है। जिला स्तर पर घोषित लखपति दीदी ग्राम का राज्य स्तरीय टीम निरीक्षण करेगी, इसके बाद निर्णय लिया जाएगा। औराटोला के लिए अभी प्रस्ताव नहीं आया है।

-अश्वनी देवांगन, संचालक, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन

 

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