अबूझमाड़ के जंगलों में बजी मोबाइल की घंटी : डिजिटल युग में प्रवेश करता ‘रायनार’
Mobile phones ring in the jungles of Abujhmad: 'Raynar' enters the digital age

मिशन मोड पर ‘साय’ सरकार: घने जंगलों को चीरकर पहुँची डिजिटल रोशनी
940 से अधिक वनवासियों के जीवन में आया बड़ा बदलाव
रायपुर । छत्तीसगढ़ के सबसे अबूझ कहे जाने वाले अंचल ‘अबूझमाड़’ के घने जंगलों और पहाड़ों के बीच अब मोबाइल की घंटी गूंज उठी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर के सुदूर वनांचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम रंग ला रही है। इसी कड़ी में ओरछा विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम रायनार में नया मोबाइल टावर स्थापित कर एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की गई है। कल तक जो इलाका दुनिया की नजरों से ओझल और नेटवर्क से दूर था, वह अब सीधे डिजिटल दुनिया से कनेक्ट हो गया है।
नेटवर्क के लिए पेड़ों और पहाड़ों पर चढ़ने की मजबूरी हुई खत्म
नारायणपुर कलेक्टर ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि रायनार में स्थापित इस नए मोबाइल टावर से क्षेत्र के कई गांवों की तस्वीर बदल गई है। अब ग्राम रायनार (आबादी 590), झोरीगांव (आबादी 220), नुलवट्टी (आबादी 130) और डीडरभट्टी में पूरी तरह से मोबाइल नेटवर्क काम करने लगा है। इसके अलावा रेंगाबेड़ा और मडाली के आंशिक क्षेत्रों में भी सिग्नल पहुँच चुके हैं।
इस सुविधा से 940 से अधिक ग्रामीणों को सदियों पुरानी भौगोलिक अलगाव की समस्या से मुक्ति मिल गई है। इससे पहले यहाँ के ग्रामीणों को सिर्फ एक फोन कॉल करने या सिग्नल ढूँढने के लिए ऊंचे पेड़ों, पहाड़ों या कई किलोमीटर दूर दूसरे गांवों तक भटकना पड़ता था।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे विद्यार्थी और ग्रामीण
डिजिटल कनेक्टिविटी का यह नेटवर्क सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि इस आदिवासी अंचल के विकास का नया हाईवे साबित होगा। डिजिटल पढ़ाई का सपना हुआ सच होगा। अब अबूझमाड़ के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, वे घर बैठे ही देश-दुनिया का ज्ञान हासिल कर सकेंगे। शासन की कल्याणकारी योजनाओं, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और डिजिटल भुगतान की सुविधा अब सीधे ग्रामीणों के मोबाइल तक पहुंचेगी। इसी तरह स्वास्थ्य संकट या किसी आपातकालीन स्थिति में अब ग्रामीण सीधे एम्बुलेंस, डॉक्टरों या जिला प्रशासन से संपर्क कर सकेंगे, जिससे समय पर इलाज संभव होगा।
अबूझमाड़ अब अबूझ नहीं रहेगा
रायनार में पहली बार मोबाइल स्क्रीन पर नेटवर्क की ‘फुल डंडियां’ देखकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। स्थानीय ग्रामीणों ने शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह हमारे लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। अब हम भी देश-दुनिया से सीधे जुड़ गए हैं और हमारा क्षेत्र भी विकास की दौड़ में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेगा।
साय सरकार द्वारा मिशन मोड में किए जा रहे इस प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि बस्तर के घने जंगलों के बीच रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।




