छत्तीसगढ़

झुग्गी की तंग गलियों से शोध के सपनों तक: श्रवण बाधित सुश्री पूजा साहू को मिला नई जिंदगी का सहारा

From the narrow streets of a slum to dreams of research: Hearing-impaired Ms. Pooja Sahu finds a new lease on life

डिजिटल श्रवण यंत्र और रोजगार मिलने से खिल उठी मुस्कान, अब पीएचडी कर समाज सेवा का सपना करेंगी पूरा

रायपुर। सपनों की कोई आवाज नहीं होती, लेकिन उन्हें पूरा करने का हौसला हर मुश्किल से बड़ा होता है।गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला के वार्ड क्रमांक 1 सिंचाई कॉलोनी सारबहरा स्मृति वाटिका गौरेला की झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली 75 प्रतिशत श्रवण बाधित सुश्री पूजा साहू ने अपने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास से यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति इंसान को मंजिल तक पहुंचा ही देती है।

आर्थिक अभाव, सुनने में कठिनाई और सीमित संसाधनों के बीच भी सुश्री पूजा ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार पढ़ाई जारी रखी और नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने भीतर उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना जीवित रखा। उनका लक्ष्य पीएचडी कर शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना है। लेकिन श्रवण संबंधी समस्या और आर्थिक कठिनाइयां उनके रास्ते की बड़ी बाधा थीं।

अपने सपनों को नई ताकत देने की उम्मीद लेकर सुश्री पूजा समाज कल्याण विभाग पहुंचीं। उनकी स्थिति और संघर्ष को समझते हुए जिला कार्यालय समाज कल्याण विभाग, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही द्वारा 26 जून 2026 को उन्हें 2 नग डिजिटल श्रवण यंत्र प्रदान किए गए। श्रवण यंत्र मिलते ही सुश्री पूजा के चेहरे पर आत्मविश्वास और खुशी की चमक साफ दिखाई दी। अब वे अपनी पढ़ाई, संवाद और शोध कार्य को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकेंगी।

समाज कल्याण विभाग ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सुश्री पूजा को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी अहम पहल की। उन्हें अशासकीय समाजसेवी संस्था “प्रगति सेवा संस्था” में सामाजिक कार्यकर्ता के पद पर नियुक्त किया गया है, जहां उन्हें प्रतिमाह 10 हजार रुपये मानदेय प्राप्त होगा। यह रोजगार उनके लिए आर्थिक संबल के साथ-साथ आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बनेगा।

भावुक होकर सुश्री पूजा साहू ने समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके लिए किसी नए जीवन से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि अब वे अपने सपनों को पूरा करने के साथ समाज के अन्य दिव्यांगजनों के लिए भी प्रेरणा बनना चाहती हैं।

सुश्री पूजा की यह कहानी केवल एक दिव्यांग बेटी की सफलता नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशील योजनाओं और मानवीय पहल का जीवंत उदाहरण है, जो जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद और नया विश्वास जगा रही हैं।

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