सरकारी जमीन बचाने की गुहार लगाने वाला ही बना निशाने पर, बेदखली नोटिस से मचा विवाद
The person who pleaded to save government land became the target, and an eviction notice sparked controversy.

बिलासपुर। देवरीखुर्दओ से लगे ग्राम दोमुहानी में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत कलेक्टर से हुई है। पीड़ित सुमंत कुमार की शिकायत के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, जिससे वहां पक्का मकान बन गया। अब तहसीलदार कार्यालय ने कब्जा हटाने की बजाय शिकायतकर्ता को ही बेदखली का नोटिस थमा दिया है, जिससे पीड़ित ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है।
ग्राम दोमुहानी के खसरा नंबर 202 की शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत सुमंत कुमार द्वारा लम्बे समय से की जा रही है। शुरुआती दौर में जब शिकायत की गई थी, तब इस शासकीय जमीन पर केवल एक झोपड़ी बनी हुई थी। राजस्व अमले ने शिकायत पर समय रहते कार्रवाई नहीं की, जिसका लाभ उठाकर बेजा कब्जाधारी बुधवारी लाल ने झोपड़ी तोड़कर वहां पक्का मकान बना लिया। अतिरिक्त तहसीलदार प्रकृति ध्रुव की कोर्ट ने भूमि बेदखली के मामले में कार्रवाई शुरू की है।
पीड़ित सुमंत कुमार का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी वास्तविक सीमांकन के ही उनके खिलाफ बेदखली वारंट जारी कर दिया है। आदेशों में त्रुटिपूर्ण प्रकरण क्रमांक दर्ज होने से असमंजस की स्थिति बन गई है। पीड़ित का आरोप है कि सरकारी जमीन को बेजा कब्जा मुक्त करने के बजाय, प्रशासन शिकायतकर्ता का ही मकान तोड़ने के लिए नोटिस जारी कर रहा है। राजस्व विभाग की एकतरफा और त्रुटिपूर्ण कार्रवाई के विरोध में अब पीड़ित ने कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर निष्पक्ष सीमांकन और न्याय की मांग की है।
विरोधाभासी आदेशों से बढ़ा विवाद
राजस्व कोर्ट द्वारा जारी अलग-अलग आदेशों ने मामले को उलझा दिया है। एक ओर पूर्व में तहसीलदार ने बिना साक्ष्य और सीमांकन के कब्जा न हटाने की बात कही थी, वहीं अचानक बिना पैमाइश किए बेदखली वारंट जारी कर दिया गया। पीड़ित का कहना है कि वे सहयोग को तैयार हैं, लेकिन सीमांकन के बिना कार्रवाई गलत है।




