जनभागीदारी से जल संरक्षण : 5 प्रतिशत रिचार्ज स्ट्रक्चर अभियान से भू-जल संवर्धन को मिल रही नई गति
Water Conservation through Public Participation: '5% Recharge Structure' Campaign Giving New Momentum to Groundwater Augmentation

किसानों और ग्रामीणों की सहभागिता से जल सुरक्षा की मजबूत हो रही नींव
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के विजन को धरातल पर साकार करने की दिशा में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में संचालित 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर टैंक अभियान जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का सफल उदाहरण बनकर उभर रहा है। कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी की पहल पर संचालित यह अभियान वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी परिणाम दे रहा है।
जिले में वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने के उद्देश्य से ग्रामीणों, किसानों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के सहयोग से व्यापक स्तर पर जल संरक्षण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता और सहभागिता का परिणाम है कि अनेक ग्रामों में ग्रामीण स्वयं आगे आकर अपने खेतों एवं परिसरों में रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कर रहे हैं।
अभियान के तहत ग्राम चौपालों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन के महत्व की जानकारी दी जा रही है। कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित चौपालों में ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि वर्षा जल ही भू-जल का सबसे बड़ा स्रोत है और यदि इसे संरक्षित किया जाए तो जल संकट, सूखा तथा सिंचाई संबंधी समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है।
ग्रामीण और किसान अपने खेतों में 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर टैंक, रिचार्ज पिट तथा सोखता गड्ढों का निर्माण कर वर्षा जल को भूमि के भीतर पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि होने के साथ-साथ खेतों में नमी बनी रहती है, सिंचाई के लिए जल उपलब्धता बढ़ती है तथा कृषि उत्पादकता को भी लाभ मिलता है। किसानों की यह पहल जिले में 5 प्रतिशत अतिरिक्त जल संचयन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा है कि जल संरक्षण केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि वर्षा जल को संरक्षित कर अधिकतम मात्रा में भूमि के भीतर पहुंचाया जाए तो आने वाले समय में जल संकट की स्थिति से बचा जा सकता है। उन्होंने प्रत्येक गांव, घर और संस्थान से जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की अपील की है।
जिले में डबरी निर्माण, खेत तालाब, सोखता गड्ढों का निर्माण, नाला उपचार, जलग्रहण क्षेत्र विकास तथा वर्षा जल संचयन जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। प्रशासन की यह पहल न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं की पूर्ति की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी सशक्त माध्यम बन रही है।




