छत्तीसगढ़

आयुष्मान योजना का भुगतान अटका! प्रदेश के निजी अस्पतालों में आर्थिक संकट

Ayushman Yojana payments stalled! State's private hospitals face financial crisis

रायपुर। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले छोटे और मध्यम अस्पताल सरकारी नीतियों और भुगतान में हो रही देरी के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) रायपुर ब्रांच ने स्वास्थ्य विभाग को एक पत्र लिखकर इन अस्पतालों की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान खींचा है। पत्र में IMA ने स्पष्ट किया है कि यदि आयुष्मान योजना के तहत भुगतान संकट और अव्यावहारिक नियमों को तत्काल नहीं सुधारा गया, तो कई अस्पताल बंदी की कगार पर पहुंच जाएंगे और इसका सीधा खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ेगा।

आईएमए रायपुर ने अपने पत्र में कहा है कि प्रदेश के छोटे एवं मध्यम अस्पताल वर्तमान में कई व्यावहारिक और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, जिसका सीधा असर न केवल अस्पतालों के संचालन पर, बल्कि आम मरीजों की चिकित्सा सुविधाओं पर भी पड़ रहा है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि नवीन पोर्टल व्यवस्था के तहत एक डॉक्टर को केवल तीन स्थानों पर प्रैक्टिस की अनुमति दी गई है। इससे छोटे अस्पतालों में बड़ी सर्जरी और विशेषज्ञ सेवाएं लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। परिणामस्वरूप मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है, क्योंकि हर मरीज कॉर्पोरेट अस्पतालों में इलाज कराने में सक्षम नहीं होता।

पत्र में आईएमए ने बताया कि 20 बिस्तरों पर एक एमबीबीएस डॉक्टर की अनिवार्यता कर दी गई है। वर्तमान परिस्थितियों में अतिरिक्त डॉक्टर उपलब्ध कराना कठिन है, वहीं दूसरी ओर छोटे अस्पताल उनके वेतन का भार उठाने में भी असमर्थ हैं।

आईएमए रायपुर ने आयुष्मान भारत योजना को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। पत्र में कहा गया है कि अस्पतालों को भुगतान न तो समय पर मिल रहा है और न ही पूरी राशि प्राप्त हो रही है, जिससे अस्पतालों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।

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