छत्तीसगढ़

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर: छत्तीसगढ़ की जेलों में नई व्यवस्था लागू

Effect of Supreme Court's directives: New system implemented in Chhattisgarh jails

रायपुर। राज्य की जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या और सुविधाओं के अभाव पर सुप्रीम कोर्ट और बिलासपुर हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद जेल प्रशासन ‘मॉडल जेल मैनुअल 2016’ लागू करने की तैयारी कर रहा है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि नई जेलों के निर्माण में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।

जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों (ओवरक्राउडिंग) और बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं पर चिंता जताते हुए अदालत ने डीजी (जेल) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अब जेल प्रशासन को पांच मई तक शपथपत्र प्रस्तुत कर यह बताना होगा कि कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थान और सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।

साथ ही जेलों के औचक निरीक्षण के भी निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 18 मई तक अपने अधिकार क्षेत्र में मौजूद महिला जेलों की संख्या और उनमें उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने को कहा है।

इसमें महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों की शिक्षा और उनके समग्र कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का विवरण भी शामिल है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मॉडल जेल मैनुअल 2016 की तर्ज पर राज्य सरकार ने नई जेल नियमावली तैयार की है। इसका मुख्य उद्देश्य जेलों को केवल दंडात्मक केंद्र तक सीमित न रखकर उन्हें सुधार गृह के रूप में विकसित करना है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जेलों के निर्माण और प्रबंधन में मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही, जेल निर्माण से जुड़े निर्धारित 11 बिंदुओं का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना होगा।

नई नियमावली में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार जेलों में जाति-आधारित वर्गीकरण को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। महिला कैदियों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के साथ रहने वाली माताओं के लिए विशेष स्वास्थ्य और स्वच्छता सुविधाओं का प्रविधान किया गया है।

साथ ही, एकांत कारावास जैसी कठोर व्यवस्थाओं पर रोक लगाई गई है। बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है और विचाराधीन कैदियों के लिए निश्शुल्क कानूनी सहायता भी सुनिश्चित की जा रही है।

जेल प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए आईएसओ प्रमाणन की प्रक्रिया शुरू की गई है। डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने शपथपत्र के माध्यम से बताया कि बिलासपुर के बैमा नगई में निर्माणाधीन नई जेल का कार्य उच्च मानकों के अनुरूप किया जा रहा है, जिसकी निगरानी चार सदस्यीय विशेष समिति कर रही है। इसके अतिरिक्त, बेमेतरा में 200 कैदियों की क्षमता वाली ओपन जेल का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है।

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