छत्तीसगढ़

पाँच पीढ़ियों से सहेजी गई सांस्कृतिक विरासत आई सामने, झिरमिट्टी में मिली 250 वर्ष पुरानी पांडुलिपि

Cultural heritage preserved for five generations comes to light, 250-year-old manuscript found in Jhirmitti

अवधि में लिखित रामचरितमानस आधारित दुर्लभ हस्तलिखित धरोहर का जिओ-टैगिंग व डिजिटल संरक्षण

‘ज्ञानभारतम’ अभियान से डिजिटल युग में सुरक्षित विरासत

रायपुर । छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल से सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के ग्राम झिरमिट्टी में लगभग 250 वर्ष पुरानी एक दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि का पता चला है, जिसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित किया गया है। यह पहल न केवल प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा देने वाली है।

सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त यह पांडुलिपि ग्राम झिरमिट्टी निवासी श्री शैलेंद्र मिश्रा के घर से मिली, जो उनके परिवार में पीढ़ियों से सुरक्षित रखी गई थी। जानकारी के अनुसार, यह पांडुलिपि उनकी पत्नी श्रीमती रश्मि शुक्ला अपने मायके से लेकर आई थीं। बताया गया कि यह अमूल्य धरोहर मध्यप्रदेश के सतना जिले के कोठरी पोस्ट अंतर्गत ग्राम खटोला में लगभग पाँच पीढ़ी पूर्व उनके पूर्वज स्वर्गीय श्री बलदेव शुक्ला द्वारा लिखी गई थी। परिवार के अनुसार इस पांडुलिपि की रचना लगभग वर्ष 1776 के आसपास की गई थी। विशेष बात यह है कि पूरी पांडुलिपि अवधी भाषा में लिखी गई है और इसका विषय ‘रामचरितमानस’ पर आधारित है।

हस्तलिखित यह पांडुलिपि अपनी सुस्पष्ट लेखन शैली और आकर्षक प्रस्तुति के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, हालांकि अत्यधिक प्राचीन होने के कारण इसमें कुछ क्षति के संकेत भी दिखाई देते हैं।
ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत इस पांडुलिपि का डिजिटल संरक्षण ‘ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से मौके पर ही किया गया। विशेषज्ञों द्वारा मोबाइल के जरिए पांडुलिपि की तस्वीरें अपलोड कर उसे जिओ-टैग किया गया, जिससे यह धरोहर अब डिजिटल रूप में सुरक्षित हो गई है और भविष्य में शोध एवं अध्ययन के लिए उपलब्ध रह सकेगी।

इस महत्वपूर्ण कार्यवाही के दौरान संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल, जिला समिति के विशेषज्ञ सदस्य श्रीश मिश्र, जनपद पंचायत उदयपुर के सीईओ श्री वेदप्रकाश गुप्ता, सहायक प्राध्यापक खेमकरण अहिरवार सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे। पांडुलिपि के जिओ-टैगिंग का कार्य श्रीश मिश्र द्वारा संपन्न किया गया।

इस प्रकार की पांडुलिपियों का संरक्षण भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में अत्यंत आवश्यक है। ‘ज्ञानभारतम’ अभियान के माध्यम से देशभर में बिखरी ऐसी अमूल्य धरोहरों को खोजकर डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ अपने समृद्ध सांस्कृतिक अतीत से जुड़ सकें।

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