छत्तीसगढ़

अबूझमाड़ में औषधीय खेती की नई सुबह अब धान नहीं, बच और ब्राह्मी से बढ़ेगी किसानों की आय

A new dawn of medicinal farming in Abujhmad: No more paddy, but Bach and Brahmi to increase farmers' income

रायपुर । छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र अबूझमाड़ में आर्थिक समृद्धि की एक नई बयार चल रही है। राज्य शासन के “नई सुबह की ओर” अभियान के तहत अब यहां के आदिवासी किसान पारंपरिक फसलों के बजाय औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में औषधि पादप बोर्ड द्वारा नारायणपुर जिले के 50 से अधिक किसानों के लिए धमतरी जिले में एक विशेष अध्ययन प्रवास सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रमुख प्रशिक्षण धमतरी के कंडेल गांव में किसानों को ब्राह्मी की खेती का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें खेत की तैयारी, रोपण, सिंचाई, खाद प्रबंधन और बाजार में बिक्री की पूरी प्रक्रिया समझाई गई। जिला कंसलटेंट ने किसानों को विस्तार से मार्गदर्शन दिया। इस प्रशिक्षण में कोकमेट, कुरुषनार, कन्हारी किल्काड, कोडोली और बासिंगबाहर गांव के किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती की जानकारी दी गई। किसानों ने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा की जा रही खस, ब्राह्मी और बच की खेती का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

अनुभव साझा कर बढ़ाया उत्साह

प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता को करीब से देखा। समूह की सदस्य श्रीमती दुलारी डीमर ने बताया कि धान की तुलना में औषधीय खेती दोगुना लाभ दे रही है। इन फसलों की विशेषता यह है कि इनमें लागत कम आती है और एक बार रोपण के बाद 3 से 4 वर्षों तक लगातार उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

सरकारी सहायता और भविष्य की राह

औषधि पादप बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि बोर्ड द्वारा किसानों को न केवल निःशुल्क प्रशिक्षण और पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, बल्कि निवेशकों के साथ अनुबंध कराकर अग्रिम राशि की सुविधा भी दी जा रही है।

अभियान का लक्ष्य : औषधीय खेती

इस पहल का मुख्य उद्देश्य बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में नए रोजगार पैदा करना और किसानों की आय में 2 से 3 गुना वृद्धि कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। अध्ययन प्रवास के बाद अबूझमाड़ के किसान अब औषधीय खेती को अपनाने के लिए पूरी तरह उत्साहित और तैयार हैं।

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