फर्जी निवास प्रमाण पत्र के सहारे CRPF में नौकरी, बलरामपुर पुलिस ने खोला बड़ा रैकेट
Balrampur police busted a major racket of CRPF jobs using fake residence certificates.

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भर्ती कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का बलरामपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से फर्जी स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाता था, जिनका उपयोग दूसरे राज्यों के युवक केंद्रीय सुरक्षा बलों में छत्तीसगढ़ कोटे का लाभ लेने के लिए करते थे।
कब का है मामला
मामले की शुरुआत 28 अप्रैल 2026 को हुई, जब तहसीलदार बलरामपुर ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि 204 कोबरा बटालियन सीआरपीएफ में पदस्थ कांस्टेबल सुमित ने फर्जी तरीके से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाया है। जांच में पता चला कि राजस्थान के धौलपुर जिले का निवासी सुमित पिता अचल सिंह ने दूसरे व्यक्ति के शैक्षणिक और अन्य दस्तावेजों में हेरफेर कर अपने नाम से आवेदन प्रस्तुत किया था।
जांच के बाद दर्ज प्रकरण में पुलिस ने 14 मई को आरोपित सुमित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार उसने छत्तीसगढ़ के आरक्षण और अपेक्षाकृत कम कटऑफ का लाभ लेकर वर्ष 2023 में एसएससी के माध्यम से सीआरपीएफ में भर्ती हासिल की थी। बाद में उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की जानकारी मिली
विवेचना के दौरान पुलिस को एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की जानकारी मिली। मामले में मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी विवेक सिंह तोमर और आकाश सिंह उर्फ आकाश शर्मा को रायपुर से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि विवेक फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न तहसीलों से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाने का काम करता था।
जांच में यह भी सामने आया कि आकाश शर्मा ने अपनी पहचान बदलकर बलरामपुर निवासी तुकेश्वर के नाम से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर निवास प्रमाण पत्र हासिल किया था।
पांच हजार में बनता था फर्जी प्रमाण पत्र
पुलिस जांच की कड़ियां राजनांदगांव जिले तक पहुंचीं। 27 मई को बाघनदी थाना क्षेत्र के सीतागोटा निवासी ओमप्रकाश चंद्रवंशी को गिरफ्तार किया गया। उसने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर सिटीजन आईडी बनाकर दस्तावेज डाउनलोड करता, उनमें हेरफेर कर ऑनलाइन आवेदन जमा करता था। इसके लिए प्रति व्यक्ति चार से पांच हजार रुपये लिए जाते थे। पुलिस ने उसके कब्जे से कंप्यूटर सिस्टम भी जब्त किया है।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपित विवेक सिंह तोमर एक फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाने के बदले तीन से चार लाख रुपये तक वसूलता था।
डोंगरगढ़ से भी जारी हुए फर्जी प्रमाण पत्र
जांच में पता चला है कि गिरोह ने बलरामपुर के अलावा डोंगरगढ़ तहसील कार्यालय से भी करीब 20 से 25 फर्जी स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर कई गैर-निवासी युवक सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसी केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती हुए हैं या भर्ती का प्रयास कर रहे थे।
पुलिस अब ऐसे सभी मामलों की जांच कर रही है और संबंधित केंद्रीय सुरक्षा बलों से पत्राचार भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में केंद्रीय बलों की भर्ती का कटऑफ अन्य राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम होने के कारण बाहरी राज्यों के युवक फर्जी दस्तावेजों के जरिए यहां का निवासी बनकर भर्ती का लाभ लेने की कोशिश कर रहे थे। मामले की जांच जारी है और पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी की भी उम्मीद है।




