छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय : ऑयल पाम की खेती पर अनुदान के अतिरिक्त मिलेगी टॉपअप
Chhattisgarh government's big decision: Top-up will be provided in addition to subsidy on oil palm cultivation

खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार का उल्लेखनीय कदम
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल -ऑयल पाम के तहत चार घटकों में राज्य शासन द्वारा अतिरिक्त अनुदान दिए जाने का निर्णय लिया गया है। उल्लेखनीय है कि ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार किसानों को खेती के रख रखाव, अंतरवर्तीय फसल, ड्रिप एवं फेंसिंग के लिए टॉप अप के रूप में अतिरिक्त अनुदान प्रदाय किया जाएगा। फेंसिंग के अतिरिक्त तीन घटकों में केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा पूर्व से ही अनुदान प्रदाय किया जा रहा है।
योजना के तहत पहले केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा (60ः40 के अनुपात में) अनुदान दिए जा रहे हैं। इसके तहत 1.30 लाख रूपए प्रति हेक्टेयर के अनुदान के साथ अब राज्य सरकार द्वारा राशि 69,620 रूपए का अतिरिक्त अनुदान चालु वित्तीय वर्ष 2025-26 से देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत रख-रखाव के लिए 10,500 रुपये प्रति हेक्टेयर के इकाई लगत पर 5250 रुपये का अनुदान पूर्व से दिया जा रहा था, जिसके अतिरिक्त अब 1500 रुपये टॉप अप के रूप में राज्य शासन द्वारा अनुदान प्रदाय किया जाएगा। इसी तरह अंतरवर्तीय फसल लेने पर 10,500 रुपये प्रति हेक्टेयर के इकाई लगत पर 5250 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान पूर्व से दिया जा रहा था, जिसके अतिरिक्त अब 5000 रुपये प्रति हेक्टेयर टॉप अप के रूप में अनुदान प्रदाय किया जाएगा।
योजना के अंतर्गत ड्रिप इरिगेशन के लिए 31,399 रुपये के इकाई लगत पर 14,130 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान पूर्व से दिया जा रहा था जिसके अतिरिक्त अब 8,635 रुपये प्रति हेक्टेयर टॉप अप के रूप में अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अब फेंसिंग पर भी अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इस घटक के अंतर्गत 1,08,970 रुपये प्रति हेक्टेयर के इकाई लगत पर 54,485 रुपए प्रति हेक्टेयर टॉप अप के रूप में अनुदान प्रदाय किया जाएगा।
गौरतलब है कि ऑयल पाम एक ऐसी दीर्घकालीन फसल है जिसमे एक बार रोपण के चौथे वर्ष से पैदावार शुरू होकर 30 वर्षों तक निरंतर आय प्राप्त होती है। पारंपरिक तिलहनी फसलों की तुलना में इसकी तेल उत्पादन क्षमता चार से छह गुना अधिक होता है। अतः ऑयल पाम की खेती हेतु प्रोत्साहित करने एवं खेती की लागत कम करने के लिए राज्य शासन ने विभिन्न घटकों के अनुदान में वृद्धि की गयी है। ऑयल पाम की खेती में रोगों का प्रकोप न्यूनतम रहता है एवं यह कम श्रम में अधिक लाभ देने वाली फसल है। इसकी खेती में शुरू के 3-4 साल की समयावधि के बाद रख-रखाव बेहद कम हो जाता है। ऑयल पाम की मांग बाजार में भी अत्यधिक है, जिससे कृषकों को दशकों तक स्थाई आर्थिक लाभ मिलना सुनिश्चित है। ऑयल पाम में अनुदान एवं टॉप अप का लाभ पाने हेतु किसान अपने जिले के नजदीकी उद्यान विभाग में संपर्क कर सकते है।




