छत्तीसगढ़

दिव्यांग सशक्तिकरण की मिसाल: शासन की स्वरोजगार योजना से हेमंत साहू बने आत्मनिर्भर

An example of disabled empowerment: Hemant Sahu became self-reliant through the government's self-employment scheme.

रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिव्यांगजनों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित जनकल्याणकारी योजनाएँ जमीनी स्तर पर सकारात्मक और प्रभावी परिणाम दे रही हैं। इसी कड़ी में जिला मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी के विकासखंड मोहला अंतर्गत ग्राम कौड़ीकसा निवासी अस्थिबाधित दिव्यांग श्री हेमंत कुमार साहू की  कहानी एक प्रेरणास्पद उदाहरण के रूप में सामने आई है। शासन की स्वरोजगार मूलक ऋण योजना का लाभ लेकर उन्होंने आत्मनिर्भरता की सशक्त पहचान स्थापित की है।

 

पूर्व में श्री हेमंत साहू के पास आजीविका का कोई स्थायी साधन उपलब्ध नहीं था। सीमित संसाधनों एवं पारिवारिक दायित्वों के कारण जीवनयापन में निरंतर कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही थीं। इसी दौरान समाज कल्याण विभाग के माध्यम से उन्हें दिव्यांगजनों के लिए संचालित स्वरोजगार ऋण योजना की जानकारी प्राप्त हुई। योजना के अंतर्गत आवेदन उपरांत शासन द्वारा उन्हें 95 हजार रुपए की ऋण सहायता प्रदान की गई। प्राप्त आर्थिक सहायता का समुचित उपयोग करते हुए श्री साहू द्वारा एक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसाय की स्थापना की गई।

निरंतर परिश्रम, अनुशासन तथा व्यावसायिक दक्षता के परिणामस्वरूप अल्प अवधि में ही उनका व्यवसाय सुदृढ़ होता चला गया। मात्र डेढ़ से दो वर्षों के भीतर उन्होंने संपूर्ण ऋण राशि का सफलतापूर्वक पुनर्भुगतान कर दिया। साथ ही शासन द्वारा नियमानुसार ब्याज राशि की प्रतिपूर्ति किए जाने से उन्हें अतिरिक्त संबल और प्रोत्साहन प्राप्त हुआ।

वर्तमान में वर्ष 2026 में श्री हेमंत साहू का इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसाय मोहला क्षेत्र में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, जो जिले में दिव्यांगजनों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है। उनके व्यवसाय से न केवल उनका परिवार आत्मनिर्भर बना है, बल्कि स्थानीय स्तर पर अन्य व्यक्तियों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

श्री हेमंत साहू ने अपनी सफलता का श्रेय छत्तीसगढ़ शासन की दिव्यांग-हितैषी नीतियों, जिला प्रशासन तथा समाज कल्याण विभाग को देते हुए आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि शासन की संवेदनशील एवं समावेशी योजनाओं ने उन्हें सम्मानजनक आजीविका प्रदान कर आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर दिया है।

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