छत्तीसगढ़

प्रकृति की गोद में रोमांच- मोहरेंगा नेचर सफारी

Adventure in the lap of nature – Mohrenga Nature Safari

मोहरेंगा में जिप्सी सफारी और कॉटेज सुविधा शुरू

रायपुर। प्रकृति के करीब, पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना और स्थानीय संस्कृति व वन्यजीवों का सम्मान करते हुए की जाने वाली यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य वन एवं वन्यजीव का संरक्षण, शिक्षा और स्थानीय समुदायों को लाभ पहुँचाना ही ईको-पर्यटन है। रायपुर जिले के खरोरा के पास ग्राम मोहरेंगा में ‘नेचर सफारी मोहरेंगा’ में नई ईको-पर्यटन सुविधाओं का शुभारंभ किया गया। विधायक सर्वश्री श्री किरण सिंहदेव, अनुज शर्मा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन और वन विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि  छत्तीसगढ़ की पहचान हमारे घने जंगलों और जैव विविधता से है। हमारा लक्ष्य केवल पर्यटन का विकास करना नहीं है, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच एक संतुलन बनाना है। ये नवनिर्मित संरचनाएं पर्यटकों को प्रकृति के और करीब लाएंगी, जिससे पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी। साथ ही, ईको-पर्यटन के माध्यम से हम स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

यह सफारी रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर तिल्दा-खरोरा मार्ग पर स्थित है और करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। मोहरेंगा नेचर सफारी के माध्यम से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि क्षेत्र के स्थानीय युवा और बच्चों को प्रकृति के महत्व से जोड़ सकेंगे। यहां पर्यटक 10 किलोमीटर लंबी जिप्सी सफारी का आनंद ले सकते हैं। सफारी के दौरान चीतल, जंगली सूअर, खरगोश, अजगर जैसे वन्यजीवों और नीलकंठ, कोयल, ईगल जैसे पक्षियों को देखा जा सकता है।

पर्यटकों के लिए वॉच टॉवर, किड्स प्ले एरिया और सुंदर गार्डन की सुविधा भी विकसित की गई है। रात्रि विश्राम के लिए यहां चार सुसज्जित कॉटेज बनाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यहां के रेस्टोरेंट का संचालन ‘जय माँ अंबे महिला स्व-सहायता समूह’ द्वारा किया जा रहा है। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। मोहरेंगा नेचर सफारी पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और पर्यटन विकास का एक अच्छा उदाहरण है, जो भविष्य में रायपुर के पास एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा।

सफारी क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए 8 तालाब, एनीकट और घास के मैदान विकसित किए गए हैं, जहां सौर ऊर्जा आधारित पंपों से पानी की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए लगभग 16 किलोमीटर लंबी चौनलिंक फेंसिंग भी की गई है। यह क्षेत्र साजा, खैर, महुआ, अर्जुन जैसे उपयोगी वृक्षों और सफेद मुसली, सतावर जैसी औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध है। साथ ही यहां स्थित ‘दोहरा तिहरा माता’ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।

 

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