बस्तर में माओवादी साम्राज्य ढहा, ‘लाल आतंक’ का सूर्यास्त करीब
Maoist empire collapses in Bastar, sunset of 'red terror' nears

जगदलपुर। कभी समानांतर सत्ता का दावा करने वाला बस्तर का माओवादी नेटवर्क अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। शीर्ष माओवादी कमांडर पापाराव के समर्पण के साथ ही दंडकारण्य क्षेत्र में संगठन का नेतृत्व ढांचा लगभग धराशाई हो गया है। पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों की सतत, इंटेलिजेंस आधारित और बहुस्तरीय रणनीति ने इस बदलाव को संभव बनाया है। अगस्त 2024 में तय लक्ष्य मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा के समूल उन्मूलन से पहले ही इसके निर्णायक परिणाम सामने आने लगे हैं।
इस अवधि में माओवादी प्रमुख बसव राजू समेत प्रदेश में सक्रिय 14 शीर्ष माओवादी मारे गए हैं, जिनमें नौ केंद्रीय समिति सदस्य व पांच दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2024 से अब तक 232 मुठभेड़ों में 499 माओवादी मारे गए, 1921 गिरफ्तार हुए और 2756 ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की। इसके साथ ही 1200 से अधिक हथियार और 1400 से ज्यादा आईईडी बरामद किए गए, जिससे संगठन की सैन्य क्षमता गंभीर रूप से कमजोर हुई।




