छत्तीसगढ़

खेल परीक्षा में छात्रों को मिले सिर्फ 0 और 2 अंक

Students got only 0 and 2 marks in sports exam

बिलासपुरः लगातार हो रहे पेपर लीक और राज्य में थोपी गई सेमेस्टर प्रणाली के कारण छात्र मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। इसे लेकर आक्रोशित छात्र संगठन आल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गनाइजेशन ने जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाते हुए व्यवस्था में आमूलचूल सुधार की मांग की है।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा प्रणालियों में आ रही लगातार गड़बड़ियों ने ईमानदारी से तैयारी करने वाले होनहार छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। एआईडीएसओ जिला कमेटी के नेतृत्व में छात्रों ने कलेक्टर कार्यालय के सामने प्रदर्शन करने पहुंचे। छात्रों का कहना है कि राजस्थान में पेपर लीक के बाद उपजे संकट और यूपी के छात्र ऋतिक मिश्रा द्वारा मानसिक तनाव में की गई आत्महत्या जैसी घटनाएं बढ़ना, यह बताने के लिए काफी हैं कि यह परीक्षा प्रणाली कितनी खोखली हो चुकी है।

परीक्षाओं के आयोजन में पूरी तरह विफल साबित हो रही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि अटल विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कालेजों का हाल भी बेहद दयनीय है। नई शिक्षा नीति के नाम पर थोपी गई सेमेस्टर प्रणाली और चार वर्षीय स्नातक कोर्स छात्रों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। कालेजों में न तो पर्याप्त प्रोफेसर हैं और न ही लैब व लाइब्रेरी की मूलभूत सुविधाएं। हाल ही में जारी बीए प्रथम सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों ने तो छात्रों को सन्न कर दिया है, जहां कापियों के मूल्यांकन में भारी लापरवाही के चलते छात्रों को शून्य, दो या तीन नंबर थमा दिए गए हैं। नियमों में रिचेकिंग का विकल्प न होने से छात्रों का पूरा भविष्य दांव पर लग गया है।

साल में आठ बार एग्जाम फीस, पढ़ाई हुई महंगी

छात्रों ने आरोप लगाया कि दोषपूर्ण नीति के कारण शिक्षा का पूरी तरह से व्यवसायीकरण हो गया है और कोचिंग उद्योग फल-फूल रहा है। सेमेस्टर सिस्टम लागू होने से जहां पहले छात्र साल में तीन बार परीक्षा फीस देते थे, वहीं अब उन्हें आठ बार फीस देनी पड़ रही है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

मूल्यांकन की गड़बड़ी सुधरे, मिले रिचेकिंग का मौका

पीड़ित छात्रों ने मांग उठाई है कि पेपर लीक मामले की न्यायिक निगरानी में समयबद्ध जांच कर रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी द्वारा जारी त्रुटिपूर्ण परीक्षा परिणामों की दोबारा जांच हो, एनईपी के काले नियमों को बदलकर रिचेकिंग का अवसर बहाल किया जाए और कालेजों में तुरंत शिक्षकों की कमी दूर की जाए।

नीट पेपर लीक और त्रुटिपूर्ण सेमेस्टर प्रणाली ने छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। रसूखदारों को बचाने के चक्कर में ईमानदार छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। हमारी मांग है कि एनटीए को हटाया जाए, सेमेस्टर सिस्टम रद हो और रिजल्ट की गड़बड़ी सुधारकर कापियां दोबारा जांची जाएं।सूरज साहू, सचिव, एआइडीएसओ बिलासपुर जिला कमेटी

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