छत्तीसगढ़

अमित जोगी को आजीवन सजा, जग्गी हत्याकांड का 20 साल बाद फैसला हाईकोर्ट ने सुनाया

Amit Jogi sentenced to life imprisonment; High Court pronounces verdict in Jaggi murder case after 20 years

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड (Jaggi Murder Case) में बिलासपुर हाईकोर्ट (CG High Court) ने अपना विस्तृत आदेश अपलोड कर दिया है। अदालत ने अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जून 2003 में हुई इस हत्या ने तत्कालीन अजीत जोगी सरकार को हिलाकर रख दिया था।

NCP के नेता स्व रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा व जस्टिस अरविंद वर्मा की डिवीजन बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। CBI की अपील स्वीकार करने के साथ ही हत्याकांड के प्रमुख आरोपित पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा व एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि न पटाने पर छह महीने अतिरिक्त कठोर कारावास का आदेश दिया है। अमित जोगी को हाई कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में CBI और स्व जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अलग-अलग याचिका दायर कर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को निर्देशित किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जग्गी हत्याकांड की फाइल रिओपन कर सुनवाई की जा रही है। याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी शर्मा ने डिवीजन बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेज दिया है।

CBI की ओर से उपस्थित अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने संयुक्त रूप से निवेदन किया कि राज्य ने 31 मई 2007 को आवेदन पेशकर निचली अदालत द्वारा पारित मुख्य आरोपित अमित जोगी को बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी। उक्त आवेदन को इस कोर्ट की समन्वय पीठ ने 18 अगस्त 2011 को इस आधार पर खारिज कर दिया था। CBI द्वारा जांच किए जा रहे मामले में राज्य द्वारा दायर अपील की अनुमति के लिए आवेदन स्वीकार्य नहीं है।

CBI ने याचिका दायर कर 31 मई 2007 के फैसले और आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की समन्वय पीठ ने 12 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा विलंब के आधार पर इसे खारिज कर दिया था। इसके अतिरिक्त अमित ऐश्वर्या जोगी की बरी होने को चुनौती देने के लिए पुनरीक्षण याचिका को आपराधिक अपील में परिवर्तित करने की मांग करते हुए शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर याचिका को भी 19 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था।

18 अगस्त 2011, 12 सितंबर 2011 और 19 सितंबर 2011 के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सतीश जग्गी व CBI ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छह नवंबर 2025 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में याचिका दायर करने में हुई देरी को क्षमा कर दिया है।

आपको बता दें कि एनसीपी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी की हत्या ने उस समय की अजीत जोगी सरकार को हिला दिया था। यह घटना 4 जून 2003 की रात करीब 11 बजे की है, जब जग्गी अपनी कार से घर लौट रहे थे। मौदहापारा थाने के सामने अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। गंभीर रूप से घायल जग्गी को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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