छत्तीसगढ़

सुशासन तिहार में किसानों को मिली नई दिशा, मृदा स्वास्थ्य कार्ड से मजबूत हो रही खेती

Farmers get a new direction in Good Governance Festival, Soil Health Card strengthens agriculture

कटेकल्याण के किसानों ने अपनाई संतुलित खेती की राह, उत्पादन में वृद्धि के साथ घट रही है लागत

रायपुर। सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले के विकासखंड कटेकल्याण में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर स्थानीय किसानों के लिए नई उम्मीद और तकनीकी जागरूकता का केंद्र बनकर उभरा। शिविर में पहुंचे कृषक लखमा, मासे, मंगू सहित अनेक ग्रामीणों ने कृषि विभाग द्वारा संचालित मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की विस्तृत जानकारी ली और इसे आधुनिक खेती के लिए बेहद लाभकारी बताया। सुशासन तिहार के माध्यम से वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों तक खेती की नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हो रही है। संतुलित खाद के उपयोग से किसानों की खेती की लागत कम हो रही है और फसलों की पैदावार भी पहले से बेहतर हो रहा है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से पता चल रही जमीन की हकीकत

कृषि विभाग द्वारा किसानों को स्वस्थ मिट्टी और बेहतर पैदावार के उद्देश्य से लगातार मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं। इस कार्ड के माध्यम से किसानों को अपनी भूमि के पोषक तत्वों की सटीक और वास्तविक स्थिति का पता चल रहा है। जानकारी होने से किसान अब खेतों में बिना वजह अंधाधुंध रासायनिक खाद डालने के बजाय केवल जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग कर पा रहे हैं।

वैज्ञानिक जांच और फसलवार तकनीकी सलाह

शिविर में मौजूद कृषि अधिकारियों ने किसानों को मृदा परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाया। मिट्टी के परीक्षण के दौरान मुख्य रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जैविक कार्बन, पीएच मान तथा अन्य आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की गहन जांच की जाती है। लागत में कमी, मुनाफे में वृद्धिरू परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों द्वारा फसल के अनुसार उर्वरक उपयोग की सलाह दी जाती है। इससे रासायनिक खादों पर होने वाला फिजूल खर्च रुकता है, खेती की लागत घटती है और फसलों की गुणवत्ता व उत्पादन में सुधार होता है।

जैविक खेती के महत्व पर विशेष जोर

शिविर में पारंपरिक रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप खाद, जीवामृत, घनजीवामृत और हरी खाद के प्रयोग से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा तेजी से बढ़ती है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति मजबूत होती है, जलधारण क्षमता बढ़ती है और मिट्टी में मित्र सूक्ष्म जीवों की सक्रियता में वृद्धि होती है।

हितग्राहियों की जुबानी खेती के प्रति बढ़ा विश्वास

शिविर में शामिल हुए स्थानीय किसान लखमा, मासे और मंगू ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपना अनुभव साझा किया। मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनने के बाद अब हमें अपनी जमीन की ताकत और कमजोरी का सही-सही पता चल गया है। पहले हम बिना जानकारी के बाजार से लाकर बहुत अधिक मात्रा में रासायनिक खाद खेतों में डाल देते थे, जिससे पैसे भी बर्बाद होते थे और जमीन भी खराब होती थी। लेकिन अब संतुलित खाद के उपयोग से हमारी खेती की लागत कम हो रही है और फसलों की पैदावार भी पहले से बेहतर मिल रही है।

सुशासन तिहार के माध्यम से वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों तक खेती की नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हो रही है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी दूरगामी योजनाओं से अब यहां के आदिवासी और ग्रामीण किसान पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर आधुनिक, वैज्ञानिक और अधिक मुनाफे वाली खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

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